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कुक कम हेल्पर को 1320 रुपए मासिक भुगतान

आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों में रसोई की गर्मी में तपकर बच्चों के लिए दूध गर्म करने से लेकर दोपहर का भोजन तैयार करने वाली कुक कम हेल्पर को अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी का चौथा हिस्सा भी नहीं मिल रहा है।
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कुक कम हेल्पर को 1320 रुपए मासिक भुगतान
बड़ाखेड़ा. आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों में रसोई की गर्मी में तपकर बच्चों के लिए दूध गर्म करने से लेकर दोपहर का भोजन तैयार करने वाली कुक कम हेल्पर को अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी का चौथा हिस्सा भी नहीं मिल रहा है। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढाकर 283 रुपए प्रतिदिन यानी 8490 रुपए प्रतिमाह की थी, जबकि कुक कम हेल्पर का मानदेय मात्र 1320 रुपए महीना है। पिछले काफी समय से कुक कम हेल्पर का मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही है। जिसको लेकर गत वितीय वर्ष में सरकार ने मानदेय में 10 प्रतिशत वृद्धि कर 1200 रुपए से बढ़ाकर 1320 रुपए महिने मानदेय कुक कम हेल्पर के लिए खर्च चलाना मुश्किल है।
नहीं कर पा रहे दूसरा कार्य
स्कूल में पोषाहार को पकाने वाले कुक कम हेल्पर सुबह 7 बजे से 12 बजे तक पोषाहार पकाने का कार्य करते हैं। इसके बाद बच्चों को खाना खिलाकर घर जाते हैं। ऐसे में कुक कम हेल्पर मजदूरी, नरेगा सहित अन्य कार्य नहीं कर पाते हैं। वहीं इतना कम मानदेय होने के बावजूद भी यह राशि भी समय पर नहीं मिल पाती है। वहीं दीपावली, शीतकालीन, ग्रीष्मकालीन आदि का मानदेय काट लिया जाता है।
इनका कहना है
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की कुक कम हेल्पर गुड्डी बाई, सुनीता शर्मा, रतन कंवर, गमा बाई आदि ने बताया कि सुबह 7 बजे स्कूल आते हैं और दोपहर 12 बजे तक काम करते हंै। इसके बावजूद मात्र 1320 रुपए का मानदेय दिया जा रहा है। कई बार तो मानदेय भी समय पर नहीं मिलता।
बढ़ाना चाहिए मानदेय
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि हेल्पर का मानदेय काफी कम है। इसको लेकर शिक्षक संघ ने कई बार मांग उठाई है, मानदेय कम होने से पोषाहार पकाने में काफी परेशानी आती है। सरकार को इनका मानदेय अकुशल श्रमिक जितना तो बढ़ाना ही चाहिए। मानदेय बढ़ाने को लेकर सरकार के समक्ष पक्ष रखेंगे।

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